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: जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है: रामानन्दाचार्य

बमबम यादव

Tue, Nov 22, 2022

अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या के स्वर्गद्वार स्थित गहोई मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के अमृत वर्षा के चौथे दिन व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज के सानिध्य में गहोई मंदिर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़ी ही दिव्यता के साथ मनाया गया। व्यासपीठ से कथा कहते जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि बिना भगवान श्री राम की मर्यादा के भगवान कृष्ण की कथा को मनुष्य आत्मसात नहीं कर सकता है। यदि भगवान श्री कृष्ण की कथा समुद्र है तो भगवान श्री राम की कथा समुद्र को पार करने के लिए राम की मर्यादा का सेतु जीवन में निश्चित ही बनाना पड़ेगा तब कृष्ण कथा रूपी समुद्र का हम पार पा सकते है। उन्होंने कहा कि एक मर्यादा के उत्कृष्ट मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्रीराम दूसरे सृष्टि के मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की एक वाणी जीवन के शाश्वत मूल्यों की स्थापना करती है तो दूसरे का चरित्र जीवन में निर्माण में भूमिका अदा करती है। भारतीय संस्कृति परंपरा और धर्म भगवान श्री कृष्ण और राम से ही अनुप्राणित है। हमारा राष्ट्र इन दोनों संस्कृतियों के संरक्षण में ही आज अपनी आध्यात्मिक वैभव की पराकाष्ठा को प्राप्त कर रहा है भगवान श्रीराम का जन्म जग मंगल , राष्ट्र रक्षा और धर्म की उपासना के लिए होता है। भगवान श्री राम की कथा कलयुग में अमृत के समान है उनके पद चिन्हों पर चलकर मनुष्य परम पद पा सकता है। आज की कथा में रंग महल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास शामिल हुए। कथा के पूर्व में यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला आदि ने व्यासपीठ की आरती उतारी।यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा श्रवण करने आए सभी भक्तों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

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