: हनुमानगढ़ी के पहलवान पूरी दुनिया की कुश्ती के लिए नजीर है: मामा दास
Mon, Oct 21, 2024
कहा,देश के युवाओं की कुश्ती में रुचि रखना चाहिए इससे सबका विकास होगा
निलिख मिश्रा व अरविंद यादव ने स्टेट चैंपियनशिप में जीता सिल्वर मेडल,लड़ेंगे नेशनल चैंपियनशिप
हनुमानगढ़ी के इमली बगिया में महंत प्रभुराम दास ने किया जोरदार स्वागत, देश का नाम रोशन करने का दिया आशीर्वाद
अयोध्या। कुश्ती एक ऐसा खेल है जिसमें खून पसीना दोनो लगता है। कुश्ती लड़ने वाले पहलवान अपना अपने परिवार के साथ देश समाज सभी का नाम रोशन करते है उक्त उद्गार हनुमानगढ़ी के महंत समाजसेवी प्रभुराम दास उर्फ मामा दास का। मामा दास जी महाराज अपने आश्रम इमली बगिया में स्टेट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहलवान निलिख मिश्रा व अरविंद यादव का सम्मान कर रहें थे। ये दोनो पहलवान अब नेशनल चैंपियनशिप में कुश्ती लड़ेंगे जहां से फिर ये देश के लिए हंगरी में होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेंगे। सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए महंत प्रभुराम दास उर्फ मामा दास कहते श्री हनुमानगढ़ी का अखाड़े पर जोर करने वाले पहलवान पूरी दुनिया के पहलवानों व कुश्ती के नजीर है क्योंकि बंजरगबली के आराधना करते हुए पहलवान पूरी तरह शाकाहारी जीवन जीते हुए अखाड़ों में अपना करतब दिखाते हुए पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाया है। आज भी यहां पर पहलवान कुश्ती लड़ते है और देश प्रदेश व विदेशों में हनुमानगढ़ी का नाम रौशन करते है। मामा दास जी ने कहा कि हमारे हनुमानगढ़ी के इमली बगिया के अखाड़े लड़ने वाले पहलवान निखिल मिश्रा व अरविंद यादव ने कुछ दिन पहले गोरखपुर में मण्डलीय विद्यालयीय खेल खूद प्रतियोगिता जो स्टेट स्तर का आयोजन था उसमें तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए सिल्वर मेडल जीता है। ये पहलवान आगे नेशनल खेलेगे इसके बाद आगे की प्रतियोगिता वर्ल्ड चैंपियनशिप जो हंगरी में होने वाला है उसमें प्रतिभाग करेंगे यह देश के लिए गौरव का विषय होगा। ऐसे पहलवानों को मदद करके और आगें बढ़ाना चाहिए जिससे ये देश दुनिया में अपना अपने परिवार व समाज के साथ देश का नाम रौशन करेंगे। मामा दास ने कहा कि जो भी पहलवानी में रुचि रखतें है वे यहां रहकर कुश्ती लड़ सकते हैं उनका सारा खर्चा हम उठायेंगे। इमली बगिया में इस समय करीब दो दर्जन पहलवान कुश्ती लड़ते है। आज इमली बगिया में इनका विशेष सम्मान किया गया। महंत सूर्यभान दास ने कहा कि ऐसे नौजवान पहलवानों पर पूरे देश को गर्व है। इन पहलवानों को जो भी जरूरत होगी उनको पूरा करकें उन्हें आगे बढ़ाने का काम करेंगे। हमारा आशीर्वाद हमेशा इनके साथ है। महंत उपेंद्र दास व लवकुश दास ने भी पहलवानों के उज्जवल भविष्य की कामना की वा सिल्वर मेडल के लिए बधाई दिया। निखिल मिश्रा ने कहा कि हमे अपने ऊपर गर्व है कि हमे इतना प्यार दुलार व अपनापन देने वाले संत महंत व बड़े भाई है जो हमारी कुश्ती व खेल में मदद करते है। उन्हीं के आशीर्वाद से हमने स्टेट स्तर पर सिल्वर मेडल जीता है आगे नेशनल खेलेंगे और नेशनल में भी जीत दर्ज करके अपने देश के लिए कुश्ती खेलेंगे। निखिल ने कहा पूरी डाइट से लेकर हर छोटी बड़ी सभी जरूरतों को मामा दास जी ने पूरा किया है। इसके अलावा मेरे बड़े भाई सागर गोस्वामी,अभिषेक शुक्ला,मुन्ना यादव का सहयोग हमेशा रहा है।सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।
: वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा: बजरंग दास
Mon, Oct 21, 2024
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में श्रीमद्भागवत कथा की बह रही रसधार
श्रीमद्भागवत कथा आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में हो रहा
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में कार्तिक मास के पावन अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस राष्ट्रीय कथाव्यास एवं श्रीबाला जी सेवा धाम नागौर, राजस्थान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा 5 वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है तब वह साधक भगवत धाम को प्राप्त करता है। महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास जी ने पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए कहा जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर के भगवान के धाम को प्राप्त करता है। वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा। मनुष्य जन्म को प्राप्त करके प्रभु के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करके सभी साधक भक्तजन सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं।स्वामीजी ने कहा कि हिरण्यकश्यप ने घोर तप किया ब्रह्मा जी से वरदान भी प्राप्त किया लेकिन साधक भक्तों के मन में यदि अभिमान व्याप्त हो जाता है तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग हो जाता है और पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकशिपु के पुत्र बालक प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। प्रह्लाद जी की दृढ़ भक्ति को देख कर भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। श्रीमद्भागवत कथा आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण महाराज के संयोजन में हो रहा है। इससे पहले कथा के यजमान ने व्यासपीठ की दिव्य आरती उतारी। अंत में कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित हुआ। इस अवसर पर हजारों भक्तजनों ने कथा का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बनाया।
: श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है: महंत कमलनयनदास
Sun, Oct 20, 2024
श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं: महंत राजू दास
अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का हुआ विमोचन
सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से यंत्र को अभिमंत्रित कर सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य:डा. राजानंद शास्त्री
अयोध्या। श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है। श्रीराम की कृपा यदि मिल जाए, तो बजरंगबली की कृपा अपने आप मिल जाती है। यह उद्गार हैं, मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास के। वह वशिष्ठ चौक स्थित अरुंधति भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का विमोचन कर रहे थे। इस अवसर पर कमलनयनदास ने अयोध्या की गौरव यात्रा का भी स्मरण कराया। कहा, अयोध्या ने सदियों तक संताप झेला है, अब अयोध्या में नित्य उत्सव हो रहा है। राममंदिर निर्माण से अयोध्या का वैभव लौटा है। इस दौरान महंत कमलनयनदास सहित महंत छविरामदास, महंत धर्मदास, आचार्य सतीश वैदिक समेत अन्य संतों का सम्मान किया गया।
समारोह का संचालन प्रख्यात हिंदूवादी नेता एवं हनुमानगढ़ी से जुड़े - महंत राजूदास ने कहा कि श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं। राम की संस्कृति, अयोध्या की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
डा. राजानंद शास्त्री ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में अयोध्या में पांच दिनों तक सवा लाख राम मंत्रों का जाप किया जाएगा। इसमें 1100 वैदिक आचार्य पाठ करेंगे। उन्होंने बताया कि रामरक्षा यंत्र का प्राचीन शास्त्रों में बहुत ही उल्लेख है। यह प्रभु श्रीराम के भक्त-सेवक और हनुमान की उपासना करने वालों के लिए सुरक्षा कवच के स्वरूप में होता है। इसके ऊपर अंकित जो दिशाएं हैं, वह वास्तु दोष से भी हम लोगों की सुरक्षा करती हैं। नवनिर्मित मंदिर में रामलला की रामरक्षा यंत्र के ऊपर ही प्रतिष्ठा हुई है। इसी महत्व को समझते हुए सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से इस यंत्र को अभिमंत्रित करके प्रत्येक सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हनुमानगढ़ी डाट काम को यह कार्य दिया गया है। यह रामरक्षा यंत्र या कवच मिलना तब शुरू होगा, जब सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र के पाठ पूर्ण हो जाएंगे।