: ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स ने अयोध्या में खोला अपना स्टोर
Sat, Oct 28, 2023
अयोध्या। उत्तर भारत की अग्रणी ज्वैलरी चेन ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स ने प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में अपने बहुप्रतीक्षित स्टोर का शुभारंभ किया है। स्टोर का उद्घाटन ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के चेयरमैन अतुल सराफ की उपस्थिति में सीए सजन कुमार अग्रवाल, अनूप सराफ, डायरेक्टर- ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स, सौमित्र सराफ, और महेश कुमार अग्रवाल द्वारा हुआ। इस अवसर पर गणेश कुमार अग्रवाल, महेश कुमार अग्रवाल, श्रीमती शीला देवी अग्रवाल, राकेश कुमार अग्रवाल, मनीष कुमार अग्रवाल नील कमल अग्रवाल, मौसम, विधि गर्ग, आकाश, गरिमा गर्ग, श्रीमती सरोज अग्रवाल व शिवम् अग्रवाल की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। शुभारंभ के अवसर पर ग्राहकों के लिए विशेष छूट भी दी जा रही है। गोल्ड ज्वैलरी के मेकिंग चार्जेज पर 20 प्रतिशत की और आभूषणों में लगे डायमंड की कीमत पर भी 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस अवसर पर अनूप सराफ ने कहा, “हम अयोध्या में अपने नए स्टोर के शुभारंभ करके बेहद उत्साहित हैं। यह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि हम उत्तर भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना चाहते हैं। हम अपने ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाली ज्वैलरी और उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।“ सजन कुमार अग्रवाल ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, “यह हम सब के लिए बेहद खास क्षण है। अयोध्यावासियों को अब ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के उच्च-गुणवत्ता वाले आभूषणों और उत्कृष्ट ग्राहक सेवा प्राप्त होगी। महेश कुमार अग्रवाल - ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स स्टोर अयोध्या ने कहा, “हम अयोध्यावासियों को ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स की समृद्ध परंपरा के अनुरूप सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली ज्वैलरी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अयोध्या में स्टोर खुल जाने से अयोध्यावासियों को अब खास मौकों पर आभूषणों की खरीदारी करने के लिए बड़े शहरों की यात्रा नही करनी होगी, उन्हे समय और पैसे की बचत के साथ उत्कृष्ट ज्वैलरी यहीं उपलब्ध होगी।
: वेदमंत्रों के साथ श्रीराम का हुआ राज्याभिषेक, हर हर महादेव के उद्घोष से गूंजी दिशाएं
Sat, Oct 28, 2023
गुरुवार को प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की झांकी लीलाप्रेमियों के हृदय में उतर गई
राजा रामचंद्र की जयकार व हर हर महादेव के उद्घोष से चहुंदिशाएं गूंज उठीं
भगवदाचार्य स्मारक सदन की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में श्रीराम राज्याभिषेक की लीला का हुआ मंचन
अयोध्या। जनकसुता समेत रघुराई, पेखि प्रहरषे मुनि समुदाई। बेद मंत्र तब द्विजन्ह उचारे, नभ सुर मुनि जय जयति पुकारे… अर्थात श्री जानकीजी के सहित रघुनाथजी को देखकर मुनियों का समुदाय अत्यंत ही हर्षित हुआ। तब ब्राह्मणों ने वेदमंत्रों का उच्चारण किया। आकाश में देवता और मुनि जय हो, जय हो की पुकार करने लगे। गुरुवार को प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की झांकी लीलाप्रेमियों के हृदय में उतर गई। राजा रामचंद्र की जयकार व हर हर महादेव के उद्घोष से चहुंदिशाएं गूंज उठीं। भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या जी की सबसे प्रचीन व ऐतिहासिक पौराणिक विश्व प्रसिद्ध रामलीला जो भगवदाचार्य स्मारक सदन में संत तुलसीदास रामलीला समिति द्धारा हो रही है। रामलीला में श्रीराम राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया गया। समारोह में गुरु वशिष्ठ, विभीषण, सुग्रीव, अंगद व हनुमान समेत वानर-भालू वीर प्रभु श्रीराम के राजा रूप का दर्शन करने को आतुर दिखे। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से श्रीराम सिर झुकाकर सभी का अभिवादन करते हुए अयोध्या के राजसिंहासन पर विराजते हैं। गुरु वशिष्ठ राजतिलक करते हैं और माता कौशल्या दान देती हैं। इस अवसर पर रामनगरी के संत धर्माचार्य भूमि पर बैठते हैं और श्रीराम का तिलक कर भेंट देते हैं। बदले में श्रीराम स्वरूप अपने गले की माला उतारकर संत धर्माचार्यों को पहनाते हैं। इसके साथ ही राजा रामचंद्र की जय का उद्घोष गूंज उठता है। रामलीला में आरती देखने के लिए हजारों लोग इंतजार करते रहे। समिति के अध्यक्ष विन्दुगद्याचार्य स्वामी श्री देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज, महामंत्री संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास जी महाराज उत्तराधिकारी-धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज, उपाध्यक्ष बावन मंदिर पीठाधीश्वर श्रीमहंत वैदेही बल्लभ शरण जी महाराज,कोषाध्यक्ष बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर श्रीमहंत अवधेश कुमार दास जी महाराज, मंत्री तुलसीदास छावनी पीठाधीश्वर श्रीमहंत जनार्दन दास जी महाराज, जगद्गुरु स्वामी श्री बल्लभाचार्य जी,जगद्गुरु स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज,जगद्गुरु स्वामी श्री रामदिनेशाचार्य जी महाराज, नगर निगम महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी,
सांसद लल्लू सिंह, आचार्य सत्यदेव दास जी महाराज, सरयू आरती समिति के आयोजक रामकचेहरी पीठाधीश्वर महंत शशिकांत दास जी महाराज, एम.बी.दास जी, पत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंत मनीष दासजी, शिवम श्रीवास्तव एवं आदि साधु संत सद्गृहस्थ मौजूद रहें।
: ऐश्वर्य से जो परिपूर्ण है वही परब्रह्म है: श्री धराचार्य जी
Sat, Oct 28, 2023
कहा, जीव और आत्मा का संबंध नहीं बदल सकता गोपियों के तर्क को सुनकर प्रभु मौन हो गए
अयोध्या। अलीपुरद्वार पश्चिम बंगाल से पधारे बजाज परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा शरणागत रक्षक हैं प्रभु। इंद्र वरुण आदि ने प्रभु चरणों में शरणागति कि प्रभु शरण में आए इंद्र ब्रम्हा वरुण आदि को पुनः अपना लेते हैं इससे सिद्ध होता है प्रभु पुरुषोत्तम है। उन्होंने कहा कि ऐश्वर्य से जो परिपूर्ण है वही परब्रह्म है। वही भगवान है अपने सभी इंद्रियों से जो कृष्ण रस का पान करें वही गोपी है प्रभु श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ बिहार तो किया लेकिन मन को उन्नत अवस्था में स्थिर कर दिया। भगवान श्री कृष्ण गोपियों के मन की बात को जानकर सभी गोपियों को आनंद देने हेतु शरद ऋतु में कदंब वृक्ष के ऊपर बैठकर बंसी निनाद करते हैं। जीव रूपी गोपियां प्रभु कृष्ण के आमंत्रण पर सभी कार्यों को छोड़कर प्रभु के समीप जाती हैं भगवान श्री कृष्ण गोपियों को लौटने के लिए तर्क देते हैं। सभी गोपियां कन्हैया के तर्कों को सुनकर कहती हैं प्रभु संसार के जो संबंध आपने हमें बताए हैं वह संबंध केवल शरीर से हैं और शरीर तक ही सीमित हैं। यह संबंध बदल सकते हैं लेकिन जीव और आत्मा का संबंध नहीं बदल सकता गोपियों के तर्क को सुनकर प्रभु मौन हो गए। गोपियों की अनन्य भक्ति देखकर रास रचैया श्री कृष्ण प्रभु सभी गोपियों के साथ दिव्य रास करते हैं पापी कंस के बढ़ते अत्याचार को देख कर देवर्षि नारद कंस के पास जाते हैं अक्रूर जी को दूत बनाकर कंस भगवान श्रीकृष्ण को गोकुल से मथुरा बुलाते हैं पापी कंस के पास रहकर भी अक्रूरजी कन्हैया को सारी बात सच सच बता देते हैं भगवान श्रीकृष्ण मां देवकी और वसुदेव को कारागृह से मुक्त कराने के लिए मथुरा जाने को तैयार हो जाते हैं भगवान कृष्ण के जाने का समाचार सुनकर सभी ग्वाल बाल गोपियां रुदन करने लगती हैं प्रभु मथुरा नगरी पधारते हैं। सभी मथुरा नगर वासी कान्हा का दर्शन पाकर प्रसन्न हो जाते हैं अनेकों जन्मों से प्रभु का इंतजार कर रही कुब्जा प्रभु को चंदन लगाती है कान्हा का स्पर्श करने से कुब्जा नवीन रूप पा जाती है। प्रभु कंस के महल में पहुंचते हैं द्वार पर कंस ने प्रभु को मारने के लिए अनेकों योद्धा खड़े किए हैं। कन्हैया सभी का वध करते हुए महल में प्रवेश करते हैं पापी कंस को प्रभु काल के रूप में ऋषि जनों को ब्रह्म के रूप में मथुरा वासियों को प्रभु कन्हैया के रूप में जिसका जो भाव है प्रभु उसी रूप में दिखाई दे रहे हैं प्रभु पापी कंस का संहार करते हैं। पिता वसुदेव मां देवकी को कारागृह से मुक्त कराते हैं कंस के पिता उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाते हैं। प्रभु गुरुदेव की महिमा को बताने हेतु संदीपन ऋषि के आश्रम में विद्या अध्ययन करने जाते हैं 64 दिन में सारी विद्या का अध्ययन करके प्रभु वापस आते हैं विश्वकर्मा को आदेश देकर समुद्र के समीप दिव्य द्वारिकापुरी का निर्माण कराते हैं।