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: करतलिया बाबा को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है

बमबम यादव

Tue, Feb 15, 2022

करतलिया बाबा की 36वीं पुण्यतिथि समारोह शुरू, बुधवार को गणेश पूजन के साथ अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन होगा

मां सरयू की विराट दिव्य 5100 फूलबत्ती की सुभव्य आरती, फूल बंगले की झाँकी का किया गया आयोजन

करतलिया बाबा का गुरुवार को होगा षोडशोपचार पूजन अभिषेक के साथ होगा श्रद्धांजलि सभा जुटेंगे रामनगरी के संत धर्माचार्य

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या संतो की सराय कही जाती है। अनेक सिद्ध भजनानंदी संत अपने त्याग तपस्या व साधना से अयोध्या ही नही अपितु पूरे देश में रामनाम की अलख  जगाई। ऐसे ही एक सिद्ध संत परमपूज्य करतलिया बाबा हुए। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित सिद्ध पीठ श्री करतलिया बाबा आश्रम स्थापित है। पूज्य महाराज जी का 36 वीं पुण्यतिथि समारोह बुधवार को बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ शुरु होगा।

करतलिया बाबा को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। वे आराध्य में लीनता की मिसाल थे। बुधवार को सरयू के संत तुलसीदासघाट स्थित करतलिया बाबा के आश्रम में उनकी 36वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी और इसी के साथ ही उनकी स्मृति फलक पर होगी।बिहार प्रांत के सहरसा जिले के ग्राम गोसपुर गोडियारी में पैदा हुए बाबा होश संभालते ही रामभक्ति की ओर उन्मुख हुए। उनकी यह वृत्ति गुरु गरभीदास के स्पर्श से और रोशन हुई।

बाल्यावस्था में बाबा ने गृह त्याग कर संतों की जमात के साथ तीर्थाटन शुरू किया। भगवान के सामने करताल बजाते हुए अहर्निश नृत्य के चलते शीघ्र ही वे करतलिया बाबा के नाम से विश्रुत हुए। तीर्थाटन के क्रम में करतलिया बाबा काशी पहुंचे और गंगा तट पर धूनी रमाई। यहां बाबा की ख्याति आम से लेकर विशिष्ट लोगों तक पहुंची। बाबा से प्रभावित होने वालों में धर्म सम्राट की उपाधि से विभूषित करपात्रीजी जैसे संत भी थे। कुछ दशक तक काशी में अखंड नाम जप में लीन रहने के बाद बाबा दैवीप्रेरणा से रामनगरी की ओर उन्मुख हुए और सरयू तट पर धूनी रमाई। यह आजादी के पूर्व का दौर था और बाबा की प्रबल भक्ति एवं त्यागवृत्ति ने तत्कालीन अंग्रेज डिप्टी कलेक्टर को भी प्रभावित किया और उसने खुले आसमान के नीचे तपस्यारत रहने वाले बाबा के लिए एक बड़ी छतरी की व्यवस्था की। यद्यपि बाबा की रुचि आश्रम बनाने में नहीं थी और भजन के अलावा दुनियादारी से उनका सरोकार संतों एवं दीन-हीनों की सेवा तक था। इसके बावजूद भक्तों के अति आग्रह पर बाबा ने आश्रम की स्थापना स्वीकार की और यह आश्रम गहन उपासना एवं सेवा के केंद्र के रूप में स्थापित हुआ। वह सन 1987 की फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा की तिथि थी, जब बाबा ने महाप्रयाण का फैसला सुनाया। शोकाकुल भक्तों के बीच बाबा ने शालिग्राम को सिर से लगाया और तुलसीदल एवं सरयू जल का पान करने के साथ सदा-सर्वदा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। उनकी शिष्य परंपरा को आगे बढ़ा रहे करतलिया आश्रम के वर्तमान महंत रामदास त्यागी के अनुसार बाबा भले ही स्थूलत: हमारे बीच न हों पर उनकी साधना-सिद्धि की तरंगें अभी भी आश्रम में व्याप्त हैं और एक बड़े आध्यात्मिक परिकर को बराबर प्रेरित करती हैं। इस समारोह में आश्रम से जुड़े हुए पूरे भारत से शिष्य-परिकर सन्त धर्माचार्य मंदिर में आ गये है। यह कार्यक्रम मंदिर के श्री मंहत योगीराज विजयराम दास जी महराज के पावन सानिध्य में हो रहा है। कार्यकम के प्रथम दिवस आज मंदिर में अंखड़ पाठ का शुरू हो गया है। वही देर शाम पतित पावनी मां सरयू की 5100 बत्ती की भव्य आरती किया गया। आश्रम के युवा महंत बालयोगी बाबा रामदासजी महाराज कहते हैं कि हमारे गुरुजी महान्त विजयरामदासजी महाराज के सानिध्य में 16 फरवरी से यह समारोह श्रीसीतारामनाम संकीर्तन व कलश स्थापना से शुभारम्भ हो गया, जो अनवरत 24 घण्टे आठो याम तक चलेगा। इसी में आज सायं पतित पावनी माँ सरयू की विराट दिव्य 5100 फूलबत्ती की सुभव्य आरती, झाँकी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में दिल्ली से महंत रामबहादुर दास महंत कन्हैया दास राधेश्याम यादव वाराणसी सहित पूरे देश से संत साधक मौजूद रहेंगे।

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