: श्री हनुमान किला मंदिर में स्थापित हुए बर्फानीश्वर महादेव
Sun, Jul 28, 2024
शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है बर्फानीश्वर महादेव को: महंत परशुराम दास
वैदिक विद्वानों व संतों का अभिनन्दन किया समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या के बाईपास स्थित श्री संकटमोचन हनुमान किला मंदिर में मंदिर के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में श्रावण मास की पवित्र महीने में जन कल्याण और विश्वकल्याण के लिए बर्फानीश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा मुख्य यजमान समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक की। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 5 दिन पूर्व वैदिक विद्वान आचार्य कुलदीप तिवारी द्वारा कराया गया।
महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि वर्तमान समय में पूरे विश्व मे अशांति व्याप्त है। शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है। बर्फानी दादा हमेशा विश्वशांति और जीव कल्याण की बात करते थे। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा करके ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रभु श्री राम का दर्शन कर रहें हो, क्योंकि पांच सौ वर्षों के प्रतिरक्षा के बाद प्रभु श्री राम लाल अपने जन्म स्थान पर विराजमान और भगवान श्री राम के अन्नय भक्त हनुमान जी के स्थान संकट मोचन हनुमान किला में भगवान शिव भी विराजमान हो गए हैं।
समाजसेवी अमर सिंह ने बताया कि हनुमान जी ऐसे देवता जिनकी आराधना से सभी का कल्याण होता है सर्व भवंति सुखना सर्वे संतु निरामया के उद्देश्य से शिवजी की स्थापना महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में संकटमोचन हनुमान किला में उन्हीं की कृपा से किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुजारी महंत रामचरण दास खाक चौक,महंत विजय राम दास, महंत दामोदर दास, शिक्षक संघ के नेता चंद्रशेखर सिंह, उमेश सिंह, प्रमोद कुमार सोनी उर्फ मोदी, ज्ञानप्रकाश शर्मा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर संतो महंत एवं भक्तों का बृहद भंडारा भी किया गया।
: श्री राम के जीवन चरित्र से समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सकते है: संध्या
Sun, Jul 28, 2024
हनुमान बाग मंदिर का छाया रामकथा का उल्लास, संत साधक लगा रहें गोता, जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों से पटा हनुमान बाग
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जलाना पूना से पधारी प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी कर रही है।कथा के चतुर्थ दिवस में संध्या जी ने सभी भक्तों को राम कथा का रसपान बड़े ही मार्मिक एवं विस्तार से प्रसंग एवं संजीव झांकियो द्वारा करवा रही। उन्होंने बताया कि भगवान की सहज अवस्था बाल लीला के रूप में पूरे विश्व को एक नया दिग्दर्शन देता है जब भक्ति के पराभूत परमात्मा होता है तब वह बालक बन करके आता है।उन्होंने कहा कि भगवान ज्ञानी राजा के बुलाने पर भोजन करने नहीं आते पर जब कोई भक्त परमात्मा को पुकारता है तो भगवान नाचते हुए भक्तों के पास चले आते हैं। ब्रह्मम परमात्मा और भगवान तीनों एक ही तत्व है।निर्गुण वादी जिन्हें ब्रह्म कहते है विद्वान पंडित इन्हें परमात्मा कहते हैं और भक्त उन्हें भगवान कहते है। यह तीनों बातें ऐसे ही है जैसे बादल जल और बर्फ। संध्या जी ने भगवान श्री राम के बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और कथा सुनाते हुए कहा कि एक ही तत्व के रूप में तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुभव में आता है कि भगवान भक्ति के आधीन हो नरोत्तम लीला के लिए शरीर धारण करते है। भगवान अपने लीला के माध्यम से प्रत्येक लीला को अनुकरणीय रूप में प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा बाल्यकाल से मनुष्य का जीवन वैसा होना चाहिए जैसे भगवान श्री राम हमें सिखाते है। भगवान श्रीराम ने अपने श्रेष्ठ जनों के प्रति वंदन का भाव रखते है। प्रातःकाल उठिए कै रघुनाथा मात पिता गुरु नावई माथा। वर्तमान समय में हमें अपने बच्चों को अपने आराध्य श्री राम की जीवन चरित्र को पढ़ाना चाहिए जिससे वह हमारी संस्कृति और धर्म को अनुकरण में ला सकें और समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सके। माता पिता भाई बंधु गुरु और देश काल परिस्थितियों से प्रेम कर सकें। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया व जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों ने किया। यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।इस मौके पर मामा दास, लवकुश दास, महंत हरिभजन दास, पुजारी योगेंद्र दास, नितेश शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: रामचरितमानस सिखाती है जीवन जीने की कला : महंत जगदीश दास
Sat, Apr 13, 2024
हनुमान बाग में चल रहा विशाल अन्नक्षेत्र, रामभक्तों की सेवा में लस्सी,पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तोंहै समर्पित
हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया जा रहा भगवान रामलला का जन्मोत्सव, मंदिर सजा दुल्हन की तरह,बज रही बधाईयाँ
अन्नक्षेत्र प्रसाद वितरण करते सुनील दास
अयोध्या।श्रीरामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग मंदिर वासुदेव घाट में श्रीमहंत से जगदीश दास महाराज के सानिध्य में नव दिवसीय श्रीरामकथा, 151 वैदिक आचार्य नवाह पारायण पाठ, विशाल अन्नक्षेत्र का दिव्य आयोजन किया गया है। व्यासपीठ से अमृतमयी श्रीरामकथा कथा ख्यातिलब्ध कथावाचिका सुरभि जी ने उपस्थित साधु-संत एवं। भक्तगणों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि रामचरित मानस का पाठ कोई भी, कभी करे उसका फल अवश्य प्राप्त होगा। वह भी अगर हम चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक मानस का पाठ करते हैं। तो स्वाभाविक तौर पर हमारे जीवन में रामलला का प्राकट्य जरूर होगा। इस धराधाम पर अगर कहीं भी कोई अमृत है। तो वह कथारूपी अमृत है, जिसके पान से हम लोगों का सदा-सदा के लिए की कल्याण हो जाता है। इस कथारूपी अमृत का पान करने के लिए हम सब एकत्रित हुए हैं। वह भी भगवान श्रीरामलला के धाम में। तो यह सोने में सुहागा है। इस कथामृत का पान हम अवश्य करें। हमारा उद्धार हो जायेगा। यह पावन पुनीत अवध धाम है, जिसकी बड़ी ही महिमा है। यहां कथा श्रवण का बड़ा ही महत्व है। कथा सुनने और कथा सुनाने वाले दोनों का कल्याण होता है। रामचरित मानस बहुत ही पवित्र एवं पावन ग्रंथ है। यह एक ऐसा ग्रंथ है जो वानर से नर बना सकता है, जिसका कथाव्यास ने विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज ने कहा अयोध्या जी बड़ी ही पवित्र भूमि है। यहां पर किया गया पुण्य जीवन सवार देता है। हनुमान बाग मंदिर में रामभक्तों के लिए विविध प्रकार के पकवान प्रसाद रुप में भक्तों को खिला रहे है,जिसमें लस्सी, पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तों की सेवा में समर्पित है। यह अन्नक्षेत्र हनुमान बाग के भक्तों द्धारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें सुख और दुख दोनों है। हमारे जन्म-मृत्यु के बीच जो समय है उसमें सुख-दुख दोनों है। जन्म-मृत्यु के बीच हमारा जीवन सेतु है। बड़े भाग से हमें मानुष तन मिला है। इसका हम सही जगह सदपयोग करें। गोस्वामी कहते तुलसीदास हैं कि रामचरितमानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। हम रामचरितमानस पान अवश्य करें। हमारा जीवन अपने आप सुधर जायेगा। हम नित्य तरक्की के पथ पर अग्रसर होंगे। कथा की अध्यक्षता स्वामी नारायणाचार्य जी कर रहें। कार्यक्रम की व्यवस्था में सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगे है। इस मौके पर संत-महंत और भक्तगण मंगलमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ कर रहे थे।