: रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Thu, Sep 1, 2022
संत,धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को देगे श्रद्धांजलि, स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी होगी चर्चा
महाराज श्री नारियल सदृश थे, यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी: रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए।आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है।
विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य को शनिवार को उनकी 14वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। श्री हरिधाम गोपालपीठ मंदिर स्थित उनकी तपोस्थली पर पुण्यतिथि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संत- धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को अपनी श्रद्धांजलि देगें। इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा होगी।
सिद्धार्थनगर जिले में मघा नक्षत्र में जन्मे बालक हरिनाथ त्रिपाठी किशोरावस्था में अयोध्याजी आ गये। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत रामबालक दास जी महाराज के शिष्य के रूप में वेद, वेदांत एवं व्याकरण में विशिष्टता हासिल की। कर्मकांड, ज्योतिष, वाल्मीकि रामायण, गीता व गोस्वामी तुलसीदास के द्वादश ग्रंथों का वे अध्यापन भी शिक्षार्थियों को कराते रहे।उन्होंने अयोध्या के कई संस्कृत विद्यालयों में प्राचार्य पद को सुशोभित किया। भगवान सीताराम जी की आराधना व हनुमान जी की सेवा उनके चिंतन में सदैव रची-बसी रही। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया। महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है।
: अनमय की मदद को आगे आए रामनगरी के संत
Thu, Sep 1, 2022
महंत बृजमोहन दास ने चलाया अभियान बचेगा अनमय, चलेगा अनमय
अयोध्या। सुल्तानपुर का अनमय। जिसकी उम्र करीब 7 माह है। उसके इलाज में करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होंगे। घर वालों के पास इतने रुपये नहीं कि उसका इलाज करा पाएं। बच्चे की मां अंकिता की पुकार पर मदद के लिए रामनगरी अयोध्या के संत महंत आगे आए हैं। चौबृजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बृजमोहन दास महाराज ने लोगों से मदद की अपील की। आज अनमय की मां अंकिता सिंह जो सुल्तानपुर निवासी है वो अपने पति के साथ चौबृजी मंदिर पहुंची जहां भगवान का दर्शन पूजन कर महंत बृजमोहन दास महाराज का आशीर्वाद लिया। जब उन्होंने अपने बेटे के बारें में महंत बृजमोहन दास महाराज को बताया तो महंत जी की आंख भर आयी उन्होंने बच्चे के लिए आर्थिक मदद देते सभी अपने सभी शिष्यों से अपील की कि अधिक से अधिक रुपये से अनमय की मदद करे जिससे बच्चा स्वस्थ हो सके। महंत बृजमोहन दास ने अंकिता सिंह को भरोसा दिया कि चौबृजी मंदिर का द्धार उनके लिए हमेशा खुला है। वे आगे भी मदद करेंगे।महंत बृजमोहन दास ने कहा कि अनमय के लिए वो अपने शिष्यों से मिलकर भी कहेंगे और मदद करायेंगे भगवान बहुत जल्द ही बच्चे को स्वस्थ करेंगे।
अंकिता सिंह ने बताया कि अनमय 3 महीने का था। उसकी ग्रोथ नहीं हो रही थी। उसे दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में दिखाया। पता चला उसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी एस एम ए टाइप ओएनई नाम की बीमारी है। जिससे बच्चे की ग्रोथ नहीं होती है। हमारे पति सुमित कुमार यूको बैंक में नौकरी करते हैं। इतने रुपये नहीं हैं कि बेटे का इलाज करा सकें। अंकिता सिंह ने कहा कि डॉक्टारों ने बताया कि एस एम ए बीमारी करोड़ों बच्चों में एकाद को ही होती है। इस बीमारी के लक्षण मात्र 7 महीने में ही आने लगते हैं। 2 साल के भीतर ही बच्चे की मौत हो जाती है। इस बीमारी में जो इंजेक्शन लगता है, उसमें एक इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है।
सोशल मीडिया पर तमाम लोग इस बच्चे के लिए मुहिम छेड़ रखें है।सुल्तानपुर के डीएम रवीश गुप्ता भी मुख्यमंत्री विवकाधीन से संदर्भ में मदद के लिए शासन को पत्र लिखा है।
: स्वामी नारायण मंदिर में गणपति बप्पा मोरिया की मची धूम
Thu, Sep 1, 2022
रामनगरी के स्वामी नारायण मंदिर में गणेश उत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ, हुई महाआरती
नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज ने मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया: अखिलेश्वर शास्त्री
अयोध्या। बुधवार से रामनगरी गणेशोत्सव में मगन हो गई। भगवान राम की नगरी में पार्वती पुत्र गणेश के जन्मोत्सव का श्रीगणेश हुआ। रामनगरी में स्वामी नारायण संप्रदाय के आद्य संस्थापक घनश्याम महाराज की बाल्य स्थली स्वामीनारायण मंदिर रायगंज में प्रथमेश विराजमान हुए तो गणपति बप्पा मोरया के जयकारे के साथ पूजन आरंभ हो गया। बाल गणेश की प्राकट्य की बेला पर पूजन-स्तवन और शत-शत नमन करते भक्तों का मन भक्ति में रमा रहा। गणपति बप्पा दरबार में भक्तों ने शीश झुकाया। मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास शास्त्री के अध्यक्षता में भगवान गणेश का भव्य श्रृंगार, पूजन एवं आरती के विधान संपादित किए गए। मंदिर के महंत शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि यह महोत्सव जल झूलनी एकादशी तक चलेगा। जल झूलनी एकादशी को मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकलेगी जो भगवान गणेश जी की पालकी व विराजमान ठाकुर जी की पालकी के साथ निकलेगी। मां सरयू नदी पर भगवान को नौका विहार कराके प्रसाद वितरण होगा। इसके बाद भगवान गणेश जी का विसर्जन होगा। इसके बाद विराजमान ठाकुरजी की पालकी पुनः मंदिर वापस आएगी।
ज्ञातव्य हो स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद के बिना सम्भव ही नही है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। गुजरात के गलियों गलियो में घर घर जाकर भगवान स्वामी नारायण जी की महिमा का गुणगान कर लोगो को सम्प्रदाय से जोड़ा। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है। अयोध्या के समीप गोंडा की अलख गुजरात तक पहुंच कर पूरी दुनिया को मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की जन्मस्थली छपिया से 60 किलोमीटर दूर रामनगरी अयोध्या में नूतन भव्य भवन का निर्माण है जो स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के नाम से सुप्रसिद्ध है।